Chhath Puja
छठ पर्व

The Chhathi Maiya is worshipped on the Chhath festival, which is also mentioned in the Brahma Vaivarta Purana. Chhath Puja falls after six days of Diwali in the Kartik month in the Vikram Samvat. Prayers during Chhath puja are dedicated to the solar deity, Surya, to show gratitude and thankfulness for bestowing the bounties of life on earth.

दिवाली के बाद छठ पर्व का त्योहार का इंतजार भी लोग बड़ी उत्सुकता से करते हैं. बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में छठ का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है.

छठ पूजा सूर्य देव की उपासना कर उनकी कृपा पाने के लिए की जाती है. ऐसी मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से घर में धन-धान्य का भंडार रहता है. छठी माई संतान प्रदान करती हैं.

शास्त्रों में बताया गया है कि षष्ठी माता भगवान सूर्य की मानस बहन हैं। मान्यता है कि सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए शक्ति की आराधना के रूप में उनकी बहन की पूजा की जाती है। दूसरी ओर प्रकृति के छठे अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई थीं। उनको भगवान विष्णु ने बालकों की रक्षा करने के लिए रची माया के नाम से जाना जाता है।
इसलिए यह पर्व संतान की कामना करने के लिए किया जाता है। साथ ही छठी मैय्या का मां दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी भी माना जाता है। जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गये, तब श्री कृष्ण द्रौपदी को छठ व्रत रखने को कहां। द्रौपती ने व्रत का पूरा किया तब उसकी मनोकामनाएँ पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिला।


Surya Bhagwaan - Sun God

एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।
छठ पर्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो षष्ठी तिथि (छठ) को एक विशेष खगोलीय परिवर्तन होता है, इस समय सूर्य की पराबैगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं इस कारण इसके सम्भावित कुप्रभावों से मानव की यथासम्भव रक्षा करने का सामर्थ्य प्राप्त होता है। छठ पूजा के त्योहार का पालन करने से सूर्य प्रकाश के हानिकारक प्रभाव से जीवों की रक्षा होती है। हिन्दू धर्म में, कुष्ठ रोगों सहित विभिन्न प्रकार के त्वचा रोगों के इलाज के लिए भगवान सूर्य की पूजा की जाती है।
त्योहार के अनुष्ठान नियम बहुत कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाया जाता है। वे पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़े होते हैं, और प्रसाद की पेशकश करते हैं और प्रार्थना और उगते सूरज के लिए अरगी करते हैं।
पर्व के चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य में लोग दूध और जल सूर्य देवता को अर्पित करते हैं। सुबह के अर्घ्य के बाद व्रती महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं, जिसमें पहले वो पानी में घोलकर चीनी और नींबू का शरबत लेती हैं। बाद में अन्न ग्रहण करती हैं। इसके साथ ही यह व्रत और छठ पूजा संपन्न हो जाती है।

छठ व्रत कथा (Chhath Vrat Katha)



कथा के अनुसार प्रियव्रत नाम के एक राजा थे। उनकी पत्नी का नाम मालिनी था। परंतु दोनों की कोई संतान न थी। इस बात से राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे। उन्होंने एक दिन संतान प्राप्ति की इच्छा से महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। इस यज्ञ के फल स्वरूप रानी गर्भवती हो गई।

नौ महीने बाद संतान सुख को प्राप्त करने का समय आया तो रानी को मरा हुआ पुत्र प्राप्त हुआ। इस बात का पता चलने पर राजा को बहुत दुख हुआ। संतान शोक में वह आत्म हत्या का मन बना लिया। परंतु जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने की कोशिश की उनके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हुईं।

देवी ने राजा को कहा कि "मैं षष्टी देवी हूं"। मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं। इसके अलावा जो सच्चे भाव से मेरी पूजा करता है मैं उसके सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण कर देती हूं। यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करूंगी।" देवी की बातों से प्रभावित होकर राजा ने उनकी आज्ञा का पालन किया।

राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि के दिन देवी षष्टी की पूरे विधि -विधान से पूजा की। इस पूजा के फलस्वरूप उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से छठ का पावन पर्व मनाया जाने लगा।

छठ व्रत के संदर्भ में एक अन्य कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। इस व्रत के प्रभाव से उसकी मनोकामनाएं पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया।


Surya (Aditya in Hindi) is the Hindu god of the Sun. He is considered the creator of the universe and the source of all life. He is the supreme soul who brings light and warmth to the world. Surya is depicted with a Chakra, also interpreted as Dharmachakra.

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